आत्मनिर्भरता आत्मनिर्भर होना प्रत्येक बालक एवं बालिकाओं के लिए। नितांत आवश्यक है। जब मनुष्य आत्मनिर्भर हो जाता है तो उसको आत्मसंतोष ,मानसिक संतोष,आत्मविश्वास,निर्णायक क्षमता,कार्य कुशलता, व्यक्तित्व का विकास,और उनके पारिवारिक जानो को भी एक प्रकार की निश्चिंतता प्राप्त होती है। चूंकि भारत हमेशा युवान रहा है क्योंकि यहां की वसुंधरा वीरों का भोग करती है। भारत देश में युवाओं की संख्या अधिक है अतः उनका आत्मनिर्भर होना अति आवश्यक है। सर्वप्रथम भारत में धर्मनिरपेक्षता है। परंतु उसमें उत्तरप्रदेश ही एक ऐसा अजूबा क्षेत्र है जहां के युवा बहुत ही कम अवस्था में अपना लक्ष्य सिद्ध कर लेते हो। यहां बालकों का पालन पोषण बहुत शान ओ शौकत से किया जाता है। यही नहीं जब तक विवाह न हो जाए तब तक उनको अपने लक्ष्य का निर्धारण भी नहीं समझ में आता है। और आजकल के युवा पीढ़ी के जो ओछे बालक है वह भीरू प्रवृति के हो चुके है। उन्होंने बाहर पढ़ाई लिखाई के दौरान ऐसी ऐसी फुलझड़ी की दर्शन कर लिए की जा लड़के फेल हो चुके है और बहुत ही जल्द वे अब इतिहास के काले अक्षरों में नामांकित भी कर दी जाएगी।वह सभ्य बालक गण कण पकड़कर तौबा कर ली है। अतः बल्कगण अधिक सतर्क हो चुके है। अब वह आत्मनिर्भर होकर अपने माता पिता को ही देखना चाहते है। अतः हमारी यही सोच है कि आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन को सुंदर बनाए सजग रहे।स्वस्थ रहे युवाओं को जय सियाराम और r कोई मार्गदर्शन हो तो अवश्य ले।