जब जब भक्तों और देवताओं को मार्गदर्शन की आवश्यकता हुई तब तक देव ऋषि नारद उनके सम्मुख उपस्थित होकर भक्तों का और देवताओं का मार्गदर्शन देते रहे। जिन भक्तों ने देव ऋषि नारद के आदेश का पालन किया उनके बताए पथ का निर्वाह किया, वह भक्तों में श्रेष्ठ हो चुका, जैसे ध्रुव और प्रहलाद तथा देवियों में मां पार्वती श्रेष्ठ हैं,जो की शिव को प्राप्त करने में नारद के बहुत बड़ी भूमिका रही। इसीलिए यह कहा गया है कि सद्गुरु की महिमा अनंत अनंत किया क उपकार। सतगुरुदेव रूह में बैठकर अपने शिष्यों से महान कार्यों को भी संपन्न करवा सकते हैं। ऐसे ही तुलसीदास जी ने गुरुदेव को महिमा मंडल करते हुए लिखा बंदहूं गुरु पद पदम पराग सुरुचि सुवास सरस अनुराग। इसके साथ ही संत के हृदय का वर्णन किया संत हृदय नवनीत समाना। जब भी सद्गुरु की आवश्यकता हो तो उन्हें खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ती वह स्वयं ही अपने शिष्य के हृदय में बैठकर उन्हें मार्गदर्शन देते हैं और शिष्य का स्तरश्रेष्ठ हुआ तो स्वयं ही शिष्य के पास पहुंचकर प्रत्यक्ष मार्गदर्शन करते हैं। ऐसे ही गुरु की कृपा से गुरु मां भारती गिरी जी को बाबा कीनाराम के अवतारी परम पूज्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी से शक्ति और कृपा की प्राप्ति हुई। बाबा का वरद हस्त जब गुरु मां भारती गिरी की ओर पड़ी तब वह बाल्याकाल से भक्ति करती रही परंतु बाबा की जब कृपा दृष्टि पड़ी तब वह अपने आध्यात्मिक पथ की ओर तीव्रता से बढ़ने लगी। बाबा अत्यंत दयालु और अंतर्यामी एवं सर्वव्यापक हैं। भक्त उनको कहीं से भी बैठकर अपनी आत्मा से पुकारता है बाबा किसी न किसी रूप में मदद करने को तत्पर वहां उपस्थित हो जाते हैं प्रारंभ में तो अनुभव नहीं हो पता परंतु जब कई बार ऐसी घटनाएं घटित होती हैं तब शिष्य को अनुभव होने लगता है कि आज जो कुछ भी हैं उनकी दया दृष्टि से हैं और बाबा अपने सत्य निष्ठ, एक निष्ठ, ब्रह्म निष्ठ शिष्यों को सफल योनि दीक्षा देकर अध्यात्म का पथ सुगम बना देते हैं। अपने सद्गुरु बाबा सिद्धार्थ गौतम राम को आत्मा से चरण स्पर्श एवं चरण वंदन करते हुए आज वेबसाइट के पहले ब्लॉग का प्रारंभ गुरु मां हेमां भारती गिरी जी के हाथों से हो रहा है। सरकार बाबा, मलिक बाबा, बूढ़ऊ बाबा, अस्थाना बाबा, कालूराम बाबा, मां काली, भैरव बाबा एवं देवाधिदेव महादेव को समर्पित समर्पित करती हूं। जय की ना जय कालू जय काली।
